1.आपातकाल का प्रावधान भारत में किस देश से लिया गया है ?
2.राष्ट्रीय आपातकाल 356
3.आपातकाल क्या है संविधान में वर्णित
4.आपातकालीन प्रावधानों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए?
5.आपात उपबंध किस देश से लिया गया है।
6.वित्तीय आपातकाल किस देश से लिया गया है।
7.आपातकाल का प्रावधान भारत में किस देश से लिया गया है।
8.वित्तीय आपातकाल के प्रभाव
9.राष्ट्रीय आपातकाल के प्रावधान का वर्णन करें
10.आर्टिकल 359 in Hindi
11.राष्ट्रीय आपातकाल 356
राष्ट्रीय आपातकाल से जुड़ी सभी जानकारी निम्न प्रकार है -
◼️भारतीय संविधान में आपात उपबंध भारत शासन अधिनियम-1935 से लिये गए हैं।
◼️ भारतीय संविधान में आपातकालीन उपबंधों को तीन भागों में बाँटा गया है-
1.राष्ट्रीय आपात article - 352
2.राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता/राष्ट्रपति शासन Article - 356
3.वित्तीय आपात article - 360
◼️भारतीय संविधान के भाग 18 में अनुच्छेद 352 से अनुच्छेद 360 तक आपातकाल से संबंधित उपबंध उल्लिखित हैं।
◼️अनुच्छेद 352 में के अंतर्गत ‘युद्ध’ , ‘बाह्य आक्रमण’ , ‘सशस्त्र विद्रोह’ के कारण संपूर्ण भारत या इसके किसी हिस्से की सुरक्षा खतरें में हो तो राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपात की घोषणा कर सकता है।
◼️ये प्रावधान केंद्र को किसी भी असामान्य स्थिति से प्रभावी रूप से निपटने में सक्षम बनाते हैं।
◼️संविधान में इन प्रावधानों को जोड़ने का उद्देश्य देश की संप्रभुता, एकता, अखंडता, लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था तथा संविधान की सुरक्षा करना है।
◼️जब आपातकाल की घोषणा युद्ध अथवा बाह्य आक्रमण के आधार पर की जाती है, तब इसे बाह्य आपातकाल के नाम से जाना जाता है।
◼️जब इसकी घोषणा सशस्त्र विद्रोह के आधार पर की जाती है तब इसे ‘आंतरिक आपातकाल’ के नाम से जाना जाता है।
◼️ पहले मूल संविधान में ‘सशस्त्र विद्रोह’ की जगह ‘आंतरिक अशांति’ शब्द का उल्लेख था फिर 44वें संविधान संशोधन अधिनियम 1972 द्वारा ‘आंतरिक अशांति’ को हटाकर उसके स्थान पर ‘सशस्त्र विद्रोह’ शब्द किया गया।
◼️राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा संपूर्ण देश अथवा केवल इसके किसी एक भाग पर लागू हो सकती है।
◼️मिनर्वा मिल्स मामले 1980 में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
◼️भारतीय सविधान में अनुच्छेद 352 के आधार पर राष्ट्रपति तब तक राष्ट्रीय आपात की उद्घोषणा नहीं कर सकता जब तक संघ का मंत्रिमंडल लिखित रूप से ऐसा प्रस्ताव उसे न भेज दे , इससे प्रावधान को 44वें संविधान संशोधन अधिनियम 1978 द्वारा जोड़ा गया।
◼️ऐसी उद्घोषणा का संकल्प संसद के प्रत्येक सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थिति व मतदान करने वाले सदस्यों को 2/3 बहुमत द्वारा पारित किया जाना आवश्यक होगा।
◼️राष्ट्रीय आपात की घोषणा को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाता है तथा एक महीने के अंदर अनुमोदन न मिलने पर यह प्रवर्तन में नहीं रहती, किंतु एक बार अनुमोदन मिलने पर छह माह के लिये प्रवर्तन में बनी रह सकती है।
◼️राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल की उद्घोषणा को किसी भी समय एक दूसरी उद्घोषणा से समाप्त किया जा सकता है , ऐसी उद्घोषणा के लिये संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी, इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति के लिये ऐसी उद्घोषणा को समाप्त कर देना आवश्यक होता है जिसे जारी रखने के अनुमोदन प्रस्ताव को लोकसभा निरस्त कर दे।
◼️अब तक तीन बार राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा की जा चुकी है-
1.प्रथम बार - अक्तूबर 1962 से जनवरी 1968 तक-चीन द्वारा 1962 में अरुणाचल प्रदेश के North-East Fronfier Agency क्षेत्र पर हमला करने के कारण
2.द्वितीय बार - दिसंबर 1971 से मार्च 1977 तक पाकिस्तान द्वारा भारत के विरुद्ध अघोषित युद्ध छेड़ने के कारण।
3.तृतीय बार - जून 1975 से मार्च 1977 तक आंतरिक अशांति के आधार पर।
◼️आपातकाल की घोषणा के बाद केंद्र को किसी राज्य को किसी भी विषय पर कार्यकारी निर्देश देने की शक्ति प्राप्त हो जाती है, लेकिन राज्य सरकारों को निलंबित नहीं किया जाता।
◼️आपातकाल की घोषणा के बाद संसद को राज्य सूची में वर्णित विषयों पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त हो जाता है लेकिन, किसी राज्य विधायिका की विधायी शक्तियों को निलंबित नहीं किया जाता।
◼️यदि संसद का सत्र नहीं चल रहा हो तो राष्ट्रपति, राज्य सूची के विषयों पर भी अध्यादेश जारी कर सकता है।
यह सभी कानून, आपातकाल की समाप्ति के बाद छह माह तक प्रभावी रहते हैं।
◼️राष्ट्रपति, केंद्र तथा राज्यों के मध्य करों के संवैधानिक वितरण को संशोधित कर सकता है, एसे संशोधन उस वित्त वर्ष की समाप्ति तक जारी रहते हैं, जिसमें आपातकाल समाप्त होता है।
◼️लोकसभा के कार्यकाल को इसके सामान्य कार्यकाल से आगे बढ़ाने के लिये संसद द्वारा विधि बनाकर इसे एक समय में एक वर्ष के लिये कितने भी समय तक बढ़ाया जा सकता है।
◼️ और इसी प्रकार, संसद किसी राज्य विधानसभा का कार्यकाल भी प्रत्येक बार एक वर्ष के लिये कितने भी समय तक बढ़ा सकती है।
◼️ ऊपर बताए गए उपरोक्त दोनों प्रावधान आपातकाल की समाप्ति के बाद अधिकतम छह माह तक के लिये ही लागू रहते हैं।
◼️आपातकाल के समय अनुच्छेद 358 के अनुसार, जब राष्ट्रीय आपत की उद्घोषणा की जाती है तब अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह मूल अधिकार स्वत: ही निलंबित हो जाते है।
◼️ एवं जब राष्ट्रीय आपातकाल समाप्त हो जाता है तो अनुच्छेद 19 स्वत: पुनर्जीवित हो जाता है तथा
अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त 6 मूल अधिकारों को केवल युद्ध अथवा बाह्य आक्रमण के आधार पर घोषित आपातकाल में ही निलंबित किया जा सकता है।
◼️आपातकाल के समय मूल अधिकारों के स्थगन का प्रावधान जर्मनी के वाइमर संविधान से लिया गया है , अनुच्छेद 358 तथा 359 राष्ट्रीय आपातकाल में मूल अधिकार पर पड़ने वाले प्रभाव का वर्णन करते हैं , जबकि अनुच्छेद 359 अन्य मूल अधिकारों के निलंबन (अनुच्छेद 20 तथा 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को छोड़कर) से संबंधित है।
◼️अनुच्छेद 359 के अंतर्गत मूल अधिकार नहीं अपितु उनका लागू होना निलंबित होता है,अनुच्छेद 20 तथा अनुच्छेद 21 को छोड़कर
यह निलंबन उन्हीं मूल अधिकारों से संबंधित होता है जो राष्ट्रपति के आदेश में वर्णित होते है
◼️अनुच्छेद 359 के अंतर्गत निलंबन आपातकाल की अवधि अथवा आदेश में वर्णित अल्पावधि हेतु लागू हो सकता है और निलंबन का आदेश पूरे देश अथवा किसी भाग पर लागू किया जा सकता है।

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