प्राचीन भारत का इतिहास
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Explaination :- श्रमण ऐसे लोगों को कहा जाता था जिन्होंने सांसारिक जीवन को त्याग दिया हो। सुत्त पिटक में कहा गया है कि लोगों को पाँच तरह से ब्राह्मणों तथा श्रमणों की देखभाल करनी चाहिये-कर्म, वचन, मन से अनुराग द्वारा, उनके स्वागत में हमेशा घर खुले रखकर और उनकी दिन-प्रतिदिन की जरूरतों को पूरा करके।
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Explaination :- हर्षवर्धन पुष्यभूति वंश का राजा था जिसने 606 से 647 ई तक राज्य किया। हर्ष के बारे में जानकारी हर्षचरित से मिलती है जिसकी रचना उसके दरबारी कवि हर्षवर्धन ने की।
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Explaination :- कौटिल्य' को 'चाणक्य' एवं 'विष्णुगुप्त' नाम से भी जाना जाता है। इन्होंने 'अर्थशास्त्र' नामक एक ग्रन्थ की रचना की थी, जो तत्कालीन राजनीति, अर्थनीति, इतिहास, आचरण शास्त्र, धर्म आदि पर भली-भाँति प्रकाश डालता है। 'अर्थशास्त्र' मौर्य काल के समाज का दर्पण है, जिसमें समाज के स्वरूप का सर्वांग देखा जा सकता है। 20वीं शती में शामशास्त्री और गणपति शास्त्री ने अर्थशास्त्र की खोज की और उसे सम्पादित करके प्रकाशित किया। शामशास्त्री ने इसका अंग्रेज़ी अनुवाद 1915 में मैसूर से प्रकाशित किया था। गणपति शास्त्री ने इस पर एक टीका संस्कृत में लिखी थी।
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Explaination :- 'राजगृह' अथवा 'राजगीर' बिहार में नालंदा ज़िले में स्थित एक प्रसिद्ध शहर एवं अधिसूचित क्षेत्र है। यह कभी मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था, जिससे बाद में मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ। राजगीर जिस समय मगध की राजधानी थी, उस समय इसे 'राजगृह' के नाम से जाना जाता था। मथुरा से लेकर राजगृह तक महाजनपद का सुन्दर वर्णन बौद्ध ग्रंथों में प्राप्त होता है। मथुरा से यह रास्ता वैरंजा, सोरेय्य, संकिस्सा, कान्यकुब्ज होते हुए प्रयाग, प्रतिष्ठानपुर जाता था, जहाँ पर गंगा पार करके वाराणसी पहुँचा जाता था। माना जाता है कि भगवान महावीर स्वामी ने वर्षा ऋतु में राजगृह में सर्वाधिक समय व्यतीत किया था। यहाँ प्रथम विश्व बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ था।
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Explaination :- गौतम बुद्ध' का मूल नाम 'सिद्धार्थ' था। सिंहली अनुश्रुति, खारवेल के अभिलेख, अशोक के सिंहासनारोहण की तिथि, कैण्टन के अभिलेख आदि के आधार पर बुद्ध की जन्म तिथि 563 ईसा पूर्व स्वीकार की गयी है। इनका जन्म शाक्य वंश के राजा शुद्धोदन की रानी महामाया के गर्भ से माघ मास की पूर्णिमा के दिन हुआ था। शाक्य गणराज्य की राजधानी कपिलवस्तु के निकट लुम्बिनी में इनका जन्म हुआ। बुद्ध को 'शाक्य मुनि' भी कहा जाता है। इनकी माता मायादेवी इनके जन्म के कुछ देर बाद ही मर गई थीं। कहा जाता है कि तभी एक ऋषि ने कहा कि वे या तो एक महान् राजा बनेंगे, या फिर एक महान् साधु।
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Explaination :- चन्द्रगुप्त मौर्य एवं सेल्युकस के मध्य हुई संधि के अंतर्गत, जहाँ सेल्यूकस ने अनेक क्षेत्र 'एरिया', 'अराकोसिया', 'जेड्रोशिया', 'पेरापनिसदाई' आदि चन्द्रगुप्त को प्रदान किये, वहीं उसने मैगस्थनीज़ नामक यूनानी राजदूत भी मौर्य दरबार में भेजा। भारत में राजदूत नियुक्त होने से पूर्व मैगस्थनीज़ 'एराक्रोशिया' के क्षत्रप 'सिबाइर्टिओस' के यहां महत्त्वपूर्ण अधिकारी के पद पर कार्यरत था। मैगस्थनीज़ ने 'इण्डिका' में भारतीय जीवन, परम्पराओं, रीति-रिवाजों का वर्णन किया है।
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Explaination :- 'हड़प्पा' पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में स्थित 'माण्टगोमरी ज़िले' में रावी नदी के बायें तट पर स्थित पुरास्थल है। हड़प्पा में ध्वंशावशेषों के विषय में सबसे पहले जानकारी 1826 ई. में 'चार्ल्स मैन्सर्न' ने दी। 1946 में मार्टीमर ह्वीलर ने हड़प्पा के पश्चिमी दुर्ग टीले की सुरक्षा का प्राचीर स्वरूप ज्ञात करने के लिए यहाँ उत्खनन करवाया। इसी उत्खनन के आधार पर ह्वीलर ने रक्षा प्राचीर एवं समाधि क्षेत्र के पारस्परिक सम्बन्धों को निर्धारित किया है। यह नगर क़रीब 5 कि.मी. के क्षेत्र में बसा हुआ है। हड़प्पा से प्राप्त दो टीलों में पूर्वी टीले को 'नगर टीला' तथा पश्चिमी टीले को 'दुर्ग टीला' के नाम से सम्बोधित किया गया।
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Explaination :- 'तम्बाकू' की उत्पत्ति कब और कहाँ हुई, इसका ठीक पता नहीं चलता। कहते हैं कि एक बार पुर्तग़ाल स्थित फ्राँसीसी राजदूत 'जॉन निकोट' ने अपनी रानी के पास तम्बाकू का बीज भेजा और तभी से इस पौधे का प्रवेश प्राचीन संसार में हुआ। निकोट के नाम को अमर रखने के लिये तम्बाकू का वानस्पतिक नाम 'निकोशियाना' रखा गया। तम्बाकू दक्षिणी अमेरिका का पौधा माना जाता है। इसकी खेती ऐतिहासिक काल से होती चली आ रही है। यद्यपि तम्बाकू अयनवृत्तीय पौधा है, तथापि इसकी सफल खेती अन्य स्थानों में भी होती है, क्योंकि यह अपने को विभिन्न प्रकार की भूमि तथा जलवायु के अनुकूल बना लेता है।
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Explaination :- काबुल नदी अफ़ग़ानिस्तान में बहने वाली प्रमुख नदी है। वैदिक काल में इस नदी को 'कुभा' तथा प्राचीन समय में 'कोफेसा' नाम से जाना जाता था। यह नदी 'हिन्दूकुश पर्वत' की 'संगलाख श्रेणी' में स्थित उनाई दर्रे के पास से निकलती है। अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल इसी नदी की घाटी में स्थित है। अपने आख़िरी बिन्दु पर काबुल नदी स्वात और बारा नदियों के जल को लाकर अटक के समीप सिन्धु नदी में मिल जाती है। यह नदी नौका चालन के लिए बहुत ही उपयुक्त है। इसकी घाटी की मिट्टी भी बहुत उपजाऊ है।
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Explaination :- मौर्य युगीन साम्राज्य की समाप्ति के बाद शुंग वंश का प्रतापी राजा पुष्यमित्र हुआ, जिसने 36 वर्षों तक शासन किया। बौद्धिक ग्रन्थ में पुष्यमित्र को मौर्य वंश का अन्तिम शासक बतलाया गया है।
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Explaination :- चीनी बौद्ध भिक्षु ह्वेनसांग का जन्म चीन के लुओयंग स्थान पर सन 602 ई. में हुआ था। वह एक दार्शनिक, घुमक्कड़ और अनुवादक भी था। ह्वेनसांग को मानद उपाधि 'सान-त्सांग' से सुशोभित किया गया था। उसे 'मू-चा ति-पो' भी कहा जाता है। उसने हर्षवर्धन के शासन काल में भारत की यात्रा की। ह्वेनसांग ने अपनी यात्रा 29 वर्ष की अवस्था में 629 ई. में प्रारम्भ की थी। यात्रा के दौरान ताशकन्द और समरकन्द होता हुआ ह्वेनसांग 630 ई. में 'चन्द्र की भूमि' (भारत) के गांधार प्रदेश पहुँचा। गांधार पहुंचने के बाद ह्वेनसांग ने कश्मीर, पंजाब, कपिलवस्तु, बनारस, गया एवं कुशीनगर की यात्रा भी की।
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Explaination :- मौर्य काल में राजस्व एकत्र करना, आय व्यय का ब्यौरा रखना तथा वार्षिक बजट तैयार करना, 'समाहर्ता' के कार्य थे। देहाती क्षेत्र की शासन व्यवस्था भी उसी के अधीन थी। शासन की दृष्टि से देश को छोटी-छोटी इकाइयों में विभक्त किया जाता था। मौर्य शासन प्रबन्ध में 'गूढ़ पुरुषों' (गुप्तचरों) का महत्त्वपूर्ण स्थान था। इतने विशाल साम्राज्य के सुशासन के लिए यह आवश्यक था कि उनके अमात्यों, मंत्रियों, राजकर्मचारियों और पौरजनपदों पर दृष्टि रखा जाए, उनकी गतिविधि और मनोभावनाओं का ज्ञान प्राप्त किया जाए और पड़ोसी राज्यों के विषय में भी सारी जानकारी प्राप्त होती रहे। दो प्रकार के गुप्तचरों का उल्लेख है- 'संस्था' और 'संचार'।
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Explaination :- विजेता होने के साथ ही साथ एक निर्माता के रूप में यशोवर्मन ने खजुराहो में भगवान विष्णु का एक विशाल मन्दिर ('कन्दारिया महादेव मन्दिर') का निर्माण करवाया, जिसे 'चतुर्भुज मंदिर' भी माना जाता है। इस मंदिर में उसने वैकुण्ठ की मूर्ति स्थापित करायी थी।
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Explaination :- कुमारसम्भव सत्रह सर्गों का महाकाव्य है। परम्परागत मान्यता है कि कालिदास ने आठ सर्गों तक ही इस महाकाव्य की रचना की थी। अवशिष्ट 9 सर्ग किसी परवर्ती कवि के द्वारा रचे हुए हैं। वल्लभदेव, मल्लिनाथ आदि प्राचीन विश्रुत टीकाकारों ने आठ सर्गों तक ही इस महाकाव्य पर अपनी टीकाएं लिखी हैं तथा काव्यशास्त्र के प्राचीन ग्रंथों में भी कुमारसम्भव से जितने उद्धरण मिलते हैं, वे आठवें सर्ग तक के ही हैं।
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Explaination :- एलिफेंटा की गुफ़ाएँ महाराष्ट्र राज्य के मुंबई शहर में पौराणिक देवताओं की अत्यन्त भव्य मूर्तियों के लिए विख्यात है। इन मूर्तियों में त्रिमूर्ति शिव की मूर्ति सर्वाधिक लोकप्रिय है। ये गुफ़ाएँ मुंबई से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। एलिफेंटा की गुफ़ाएँ मुम्बई महानगर के पास स्थित पर्यटकों का एक बड़ा आकर्षण केन्द्र हैं।
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Explaination :- कुषाण साम्राज्य के पतन के समय उत्तरी भारत में जो अव्यवस्था उत्पन्न हो गई थी, उससे लाभ उठाकर बहुत से प्रान्तीय सामन्त राजा स्वतंत्र हो गए थे। सम्भवतः इसी प्रकार का एक व्यक्ति 'श्रीगुप्त' भी था। गुप्त राजवंश की स्थापना महाराजा गुप्त ने लगभग 240 ई. में की थी। उसका वास्तविक नाम श्रीगुप्त था। उसने मगध के कुछ पूर्व में चीनी यात्री इत्सिंग के अनुसार नालन्दा से प्रायः चालीस योजन पूर्व की तरफ़ अपने राज्य का विस्तार किया था।
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Explaination :- हड़प्पा संस्कृति की एक मुहर पर पद्मासन मुद्रा में त्रिमुखी योगी चित्रित है, जिसके दाहिनी ओर हाथी तथा बाघ और बायीं ओर गैंडा तथा भैंसा एवं सिंहासन के नीचे दो हिरन खड़े हैं। इस संकृति में गाय तथा घोड़े की मृदमूर्तियाँ (मिट्टी की मूर्ति) नहीं मिली है।
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Explaination :- सिन्धु घाटी सभ्यता में घरों के निर्माण में ईटों का प्रयोग किया गया था, मोहनजोदड़ों तथा हड़प्पा में पकी हुई ईंटों का प्रयोग प्राय: मकानों के निर्माण के लिए किया गया है। प्रत्येक आवासीय भवन के बीच में एक आंगन होता था, जिसके तीन या चारों और चार-पांच कमरे, एक रसोईघर और एक स्नानागार बना होता था। मोहनजोदड़ों के दुर्ग के दक्षिणी भाग में 750 वर्ग मीटर आकार के एक विशाल सभाभवन की रूपरेखा मिल्ली है, जिसकी छत 20 स्तम्भों पर टिकी हुई थी।
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Explaination :- स्कन्द पुराण में गढ़वाल को केदारखंड और कुमाऊँ को मानसखंड कहा गया है। समस्त प्राचीन साहित्य में गढ़वाल-कुमाऊँ को सम्मिलित रूप से 'उत्तराखंड' कहा गया है।
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Explaination :- गौतम बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था। गृह त्यागने के बाद बोधगया में उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था तथा उनकी मृत्यु कुशीनगर में हुई थी। अंतिम विकल्प सही नहीं है अन्य सभी कथन सही है।
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Explaination :- जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव थे। पार्श्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर थे, जबकि महावीर स्वामी 24वें एवं अंतिम तीर्थकर थे।
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Explaination :- मेगस्थनीज चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में भारत आया था। फाह्यान चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में भारत आया था। वास्कोडिगामा द्वारा 1498 ई. में भारत की खोज की गई जबकि कोलम्बस ने 1492 ई. में अमेरिका की खोज की थी। अत: कोलम्बस भारत नहीं आया था।
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Explaination :- अशोक के तेरहवें शिलालेख से कलिंग युद्ध तथा उसके परिणामों के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है। कलिंग युद्ध की हृदय-विदारक हिंसा एवं नरसंहार ने अशोक के हृदय-स्थल को स्पर्श किया और उसने सदैव के लिए युद्धनीति का परित्याग करके धम्म विजय की नीति का श्रीगणेश किया।
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Explaination :- आयुर्वेद के मर्मज्ञ चरक कनिष्क के राजवैद्य थे, जिन्होंने औषधिशास्त्र पर 'चरक संहिता' नामक ग्रन्थ लिखा जिसे 'भारतीय चिकित्साशास्त्र का विश्वकोश' माना जाता है।
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Explaination :- चीनी यात्री फाह्यान चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के समय में 399 ई. में भारत आया तथा 414 ई. तक उसने भारत के विभिन्न भागों का भ्रमण किया। इसका उद्देश्य बौद्ध ग्रंथों का अध्ययन करना तथा बुद्ध के चरण चिन्हों से पवित्र हुए स्थानों को देखना था। फाह्यान का जन्म चीन के 'वु-यांग' नामक स्थान पर हुआ था।
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Explaination :- गुप्त साम्राज्य के पत्तन में हूणों का आक्रमण विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यद्यपि स्कन्दगुप्त ने हूणों को परास्त किया था तथापि उसने उत्तर-पश्चिमी सीमा को सुरक्षित करने का प्रयास नहीं किया। बार-बार हूणों के आक्रमण के बावजूद गुप्त राजाओं ने उन्हें रोकने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई।
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Explaination :- गुप्तवंशीय शासक चन्द्रगुप्त द्वितीय ने शकों पर विजय के बाद 'विक्रमादित्य' की उपाधि धारण की एवं चांदी के सिक्के भी जारी किये। उसकी अन्य उपाधियाँ विक्रमांक, विक्रमादित्य तथा परम भगवत थी।
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Explaination :- उड़ीसा (वर्तमान ओडिशा) के उदयगिरि एवं खंडगिरि में खारवेल राजा के कार्यकाल के दौरान पत्थरों को काटकर गुफाओं का निर्माण किया गया था। उदयगिरि में स्थित गुफाओं में से सबसे बड़ी गुफा रानीगुफा है।
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Explaination :- दक्षिण भारत में शिव (शैव) संप्रदाय के भक्तों को 'नयनार' कहा गया। नयनार भक्तों ने भगवान शिव के सम्मान में सुंदर भजनों की रचना की थी। इनका समय सातवीं एवं आठवीं सदी के आसपास था। प्रमुख नयनार संत थे - संबंदर, अप्पर एवं सुंदरमूर्ति।
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Explaination :- उड़ीसा स्थित कोणार्क मन्दिर सूर्य देवता को समर्पित है, जो सामान्यत: 'काले पैगोडा' के नाम से विख्यात है। इस मन्दिर का निर्माण 13वीं सदी के गंग शासक नरसिंहदेव प्रथम (1236-1264 ई.) द्वारा करवाया गया था। इस मन्दिर के आधार पर 12 पहिये या चक्र निर्मित है। बारह चक्र बारह राशियों के प्रतीक हैं और सूर्य के सात घोड़े उसकी किरणों के रंगों के प्रतीक है।

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