प्राचीन भारत का इतिहास
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Explaination :- मोहनजोदड़ों में पशुपति की मूर्ति मिली है, जिस पर शिव की आकृति जैसा चित्र मिलता है। इससे इतिहासकारों ने निष्कर्ष निकाला है कि तत्कालीन समाज में पशुपति की पूजा होती थी।
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Explaination :- सिन्धु घाटी सभ्यता में घरों के निर्माण में ईटों का प्रयोग किया गया था, मोहनजोदड़ों तथा हड़प्पा में पकी हुई ईंटों का प्रयोग प्राय: मकानों के निर्माण के लिए किया गया है। प्रत्येक आवासीय भवन के बीच में एक आंगन होता था, जिसके तीन या चारों और चार-पांच कमरे, एक रसोईघर और एक स्नानागार बना होता था। मोहनजोदड़ों के दुर्ग के दक्षिणी भाग में 750 वर्ग मीटर आकार के एक विशाल सभाभवन की रूपरेखा मिल्ली है, जिसकी छत 20 स्तम्भों पर टिकी हुई थी।
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Explaination :- आर्यों का भारत पर आक्रमण 1500 ई.पू. से 1000 ई.पू. के बीच, यूनानियों का 326 ई.पू.-325 ई.पू. कुषाणों का प्रथम सदी ई. तथा हूणों का लगभग 460 ई. (स्कन्दगुप्त के शासन-काल) में हुआ। अत: उक्त आक्रान्ताओं का सही तिथि-क्रम क्रमश: आर्य, यूनानी, कुषाण तथा हूण है।
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Explaination :- गौतम बुद्ध की मृत्यु 483 ई.पू. में मल्ल गणराज्य कुशीनगर (उ.प्र.) में हुई थी। बौद्ध धर्म में 'महापरिनिर्वाण' कहा गया है।
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Explaination :- महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनकी अस्थियों को आठ भागों में बांटा गया तथा उन पर समाधियों का निर्माण किया गया, इन्हीं को 'स्तूप' कहा जाता है ध्यातव्य है कि 'स्तूप' का उल्लेख सर्वप्रथम ऋग्वेद में प्राप्त होता है, जहाँ अग्नि की उठती हुई ज्वालाओं को स्तूप कहा गया है।
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Explaination :- मेगस्थनीज चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में यूनानी शासक सेल्यूकस का राजदूत था।
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Explaination :- अशोक के प्राय: सभी अभिलेखों में उसे देवानामप्रिय प्रियदर्शी कहा गया है, अर्थात देवताओं का प्रिय राजा।
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Explaination :- आयुर्वेद के मर्मज्ञ चरक कनिष्क के राजवैद्य थे, जिन्होंने औषधिशास्त्र पर 'चरक संहिता' नामक ग्रन्थ लिखा जिसे 'भारतीय चिकित्साशास्त्र का विश्वकोश' माना जाता है।
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Explaination :- पुष्यभूति वंश के शासक हर्षवर्धन ने सातवीं शताब्दी के दौरान (606-47 ई.) शासन किया था। इसकी राजधानी कन्नौज थी।
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Explaination :- कल्लर नामक ब्राह्मण मंत्री ने कश्मीर के शाही वंश के अंतिम शासक लगतुरमान को अपदस्थ करके राजसत्ता पर अधिकार कर लिया तथा हिन्दू शाही राजवंश की नींव डाली। मुस्लिम आक्रमण के पूर्व यहाँ जयपाल शासन कर रहा था। हिन्दू शाही राजवंश की राज्यधानी उद्भांडपुर थी। राजतरंगिणी में राजा कल्लर को 'लालिया शाही' कहा गया है।
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Explaination :- हर्ष और पुलकेशिन के बीच 634 ई. में नर्मदा नदी के तट पर एक युद्ध हुआ जिसमें हर्ष की पराजय हुई, परन्तु सुधाकर चट्टोपाध्याय का विचार है कि इन दोनों राजाओं के बीच होने वाला युद्ध अंतिम युद्ध नहीं था। 643 ई. में हर्ष का कोंगोद पर आक्रमण पुलकेशिन के विरुद्ध था, जिसको जीतकर हर्ष ने अपनी पुरानी पराजय का बदला चुकाया तथा पुलकेशिन के कुछ प्रदेशों पर अधिकार कर लिया।
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Explaination :- कार्ले गुफा मन्दिर हीनयान (यह कट्टरपंथी बौद्ध भिक्षुओं का सम्प्रदाय था, इसे 'श्रावकयान' भी कहा जाता है) धर्म से संबंधित है। खंडगिरी के पत्थर काटकर बनाये गए भवन जैन धर्म से संबंधित है। खंडगिरी (उड़ीसा) पर खारवेल ने जैनों के लिए मठ बनवाये थे। बाघ गुफा बौद्ध (महायान) धर्म से संबंधित है। बादामी में चालुक्य-पुलकेशिन प्रथम (543 से 566 ई.) ने शैव मन्दिर का निर्माण करवाया था।
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Explaination :- श्री शंकराचार्य अद्वैतवाद के प्रतिपादक थे। इन्होंने मुक्ति प्राप्त करने के लिए ज्ञान को आधार माना है जबकि रामानुज मोक्ष प्राप्ति के लिए भक्ति को साधन मानते थे।
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Explaination :- बंगाल का प्राचीन नाम 'गौड़' था। कहा जाता है कि इस प्रदेश से प्रचुर मात्रा में गुड का निर्यात होने के कारण इसे गौड़ कहा जाता था। नवीं-दसवीं शताब्दी में यहाँ पाल वंश का शासन था। सेन वंश के शासनकाल (12वीं शताब्दी) में बंगाल की राजधानी लखनौती थी। ह्वेनसांग एवं बाणभट्ट के अनुसार 'बंगाल का प्राचीन नाम गौड़ देश' था। हर्ष का समकालीन राजा शशांक गौड़ नरेश था।
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Explaination :- अंकोरवाट कंबोडिया में स्थित है। यहाँ का विष्णु मन्दिर, जिसका निर्माण 1125 ई. में कम्बोडिया (कम्बुज) के शासक सूर्यवर्मा द्वितीय द्वारा करवाया गया था। यह पूर्व मध्यकालीन हिन्दू स्थापत्य की एक उत्कृष्ट रचना है।
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Explaination :- प्राचीन काल में जीवन को 100 वर्ष का मानकर 25-25 वर्ष के चार चरणों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक चरण को आश्रम की संज्ञा दी गई जो इस प्रकार हैं -
1. ब्रह्मचार्य आश्रम - (0 से 25 वर्ष)
2. गृहस्थ आश्रम - (25 से 50 वर्ष)
3. वानप्रस्थ आश्रम (50 से 75 वर्ष)
4. संन्यास आश्रम - (75 से 100 वर्ष)
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Explaination :- भारत का प्राचीनतम विश्वविद्यालय तक्षशिला (पाक) के रावलपिंडी में है, जहाँ जीवक, चन्द्रगुप्त मौर्य जैसे व्यक्ति शिक्षा प्राप्त की थी।
● तक्षशिला में चाणक्य शिक्षक के रूप में कार्य भी कार्य किया।
● नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त शासक कुमार गुप्त I (414-454 ई0 सन) द्वारा 436 ई0 सन में किया गया।
● नालन्दा विश्वविद्यालय को ध्वस्त बख्तियार खिलजी द्वारा 1199-1202 के पूर्वी अभियान के दौरान किया गया।
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Explaination :- ईसा पूर्व द्वितीय शताब्दी में कागज की कला की खोज चीनियों ने किया।
● इसमें पूर्व मिस्त्र में पेपरस नाम के पौधे से कागज बनाया जाता था।
● भारत में कागज के रूप में भोज-पत्र का प्रयोग किया जाता था।
● अखबारी कागज का सबसे बड़ा उत्पादक कनाडा है।
● चीन में सर्वप्रथम प्रतियोगिता परीक्षा शुरू की।
● चाय का प्रचलन सर्वप्रथम चीन में ही हुआ।
● भारत-चीन के बीच पंचशील समझौता 1954 में हुआ।
● माओत्से तुंग चीन का रहनेवाला था।
● चीन का राष्ट्रपिता - डॉ. सनयात सेन को कहा जाता है।
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Explaination :- शतरंज (चैस) की शुरुआत हड़प्पावासियों द्वारा की गई।
● स्वास्तिक का प्रयोग सर्वप्रथम हड़प्पावासियों द्वारा शुरू किया गया।
● जैन धर्म ने स्वास्तिक को लोकप्रिय बनाया।
● चांदी का प्रयोग भारत में सर्वप्रथम हड़प्पावासी द्वारा शुरू किया गया।
● हड़प्पा सभ्यता भारत की प्रथम शहरी सभ्यता है।
● हड़प्पा सभ्यता भारत की प्राचीनतम सभ्यता है।
● हड़प्पावासी कपास के उत्पादन में सर्वप्रथम थे।
● कपास को हड़प्पावासी 'सिन्डन' कहा करते थे।
● जौ (यव) उनका प्रमुख खाद्यान था।
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Explaination :- सिंधु घाटी के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था।
● हड़प्पा सभ्यता में अनेक फसक की खेती होती थी,जिसमें गेहूं और जौ प्रमुख थे।
● चावल का प्रयोग हड़प्पा काल में सिमित मात्रा में होती थी।
● रंगपुर और लोथल से चावल के प्रमाण मिले हैं।
● हड़प्पा वासी मेसोपोटामिया में व्यापार करते थे।
● चांदी का प्रयोग भारत में प्रथम बार हड़प्पा वासी द्वारा किया गया।
● कपास की खेती सर्वप्रथम हड़प्पा वासी द्वारा शुरू किया गया।
● चैस (शतरंज) की शुरुआत हड़प्पावासी द्वारा शुरू की गई।
● कपास को यूनानी लोग सिन्डन कहते थे।
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Explaination :- हर्षचरित के लेखक वाणभट्ट हैं।
● हर्षचरित को राजा का भारत में प्रथम चरित माना जाता है।
● प्राचीनतम भारत की पुस्तक वाल्मीकि ऋषि द्वारा रचित रामायण को माना जाता है।
● प्राचीनतम भारत की पुस्तक वाल्मीकि ऋषि द्वारा रचित रामायण को माना जाता है।
● वाल्मीकि ऋषि को भारत का आदि कवि कहा जाता है।
● व्यास मुनि को महाभारत का मूल रचयिता माना जाता है।
● पुराण के भी मूल रचयिता व्यास मुनि को माना जाता है।
● पुराण के संकलनकर्ता लोमहर्ष और उनके पुत्र उग्रश्रावा को माना जाता है।
● वर्तमान पुराण का मूल रूप गुप्त काल को माना जाता है , कुछ उसके बाद के भी।
● पुराण के पांच भाग हैं -सर्ग, प्रतिसर्ग, मन्वन्तर, वंश और वंश चरित्र हैं।
● भारत की राष्ट्रीय पुस्तक गीता है।
● पुराण भविष्यत शैली में लिखा गया है।
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Explaination :- जय हिन्द का नारा सुभाषचन्द्र बोस ने दिया।
● दिल्ली चलो का नारा भी नेता जी ने दिया।
● पं. जवाहर लाल नेहरु ने ' आराम हराम है ' का नारा दिया।
● मोतीलाल नेहरु ने फरवरी 1923 ई. में स्वराज पार्टी की स्थापना इलाहाबाद में की।
● स्वराज पार्टी का मुख्य उद्देश्य सदन के अंदर जाकर ब्रिटिश सरकार के नीति को नाकाम करना था।
● नेहरु रिपोर्ट का सम्बन्ध भारतीयों द्वारा भारत के लिए संविधान बनाने का प्रथम प्रयास से है।
● पं. जवाहरलाल नेहरु की अध्यक्षता में संविधान समीति बनाई गयी।
● मुहम्मद अली जिन्ना की जिद्द के कारण सफल नहीं हुई।
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Explaination :- बीसवीं शताब्दी में उदारवाद का उदय एक पूर्ण राजनितिक दर्शन में दुप हुआ।
● उदारवाद के उदय में जॉन कॉक ,हॉब्स, मिल बेन्थम आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
● इन विचारकों ने राज्य को यह कर्तव्य बताया है की राज्य के कल्पान के लिए कार्य करना परमं कर्तव्य है।
● उदारवाद आर्थिक क्षेत्र में 1970 के दशक में आई विश्व राजनितिक के पटल पर।
● भारत के आर्थिक उदारवाद 1991ई. में राव मनमोहन मॉडल के रूप में पूर्णरूपेण आया।
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Explaination :- 'शतपथ ब्राह्मण' शुक्ल यजुर्वेद की दोनों शाखाओं 'काण्व' व 'माध्यन्दिनी' से सम्बद्ध है। यह सभी ब्राह्मण ग्रन्थों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। इसका रचयिता याज्ञवल्क्य को माना जाता है। 'शतपथ ब्राह्मण' में वैदिक संस्कृत के सारस्वत मण्डल से पूर्व की ओर प्रसार होने का संकेत मिलता है। इसमें यज्ञों को जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण कृत्य बताया गया है। हल सम्बन्धी अनुष्ठान का विस्तृत वर्णन भी इसमें प्राप्त होता है। अश्वमेध यज्ञ के सन्दर्भ में अनेक प्राचीन सम्राटों का उल्लेख इसमें है, जिसमें जनक, दुष्यन्त और जनमेजय का नाम महत्त्वपूर्ण है।
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Explaination :- भगवान महावीर के उपदेश जैन धर्म के मूल सिद्धान्त हैं, जिन्हें 'आगम' कहा जाता है। ये अर्ध-मागधी प्राकृत भाषा में हैं। इन्हें आचारांगादि बारह अंगों में संकलित किया गया है, जो 'द्वादशंग आगम' कहे जाते हैं। वैदिक संहिताओं की भाँति जैन आगम भी पहले 'श्रुत' रूप में ही थे। महावीर स्वामी के बाद भी कई शताब्दियों तक उन्हें लिपिबद्ध नहीं किया गया था। श्वेताम्बर और दिगम्बर शाखाओं में जहाँ अनेक बातों में मतभेद था, वहीं आगमों को लिपिबद्ध न करने में दोनों एक मत थे।
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Explaination :- 'चन्द्रगुप्त द्वितीय' (शासनकाल 380-413) गुप्त वंश का राजा था। सभी गुप्त राजाओं में समुद्रगुप्त का पुत्र चन्द्रगुप्त द्वितीय सर्वाधिक शौर्य एवं वीरोचित गुणों से सम्पन्न था। चन्द्रगुप्त द्वितीय ने देव, देवगुप्त, देवराज, देवश्री, श्रीविक्रम, विक्रमादित्य, परमभागवत्, नरेन्द्रचन्द्र, सिंहविक्रम, अजीत विक्रम आदि उपाधियाँ धारण की थीं। अनुश्रूतियों में चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपनी पुत्री प्रभावती का विवाह वाकाटक नरेश रुद्रसेन से किया था। रुद्रसेन की मृत्यु के बाद चन्द्रगुप्त ने अप्रत्यक्ष रूप से वाकाटक राज्य को अपने राज्य में मिलाकर उज्जैन को अपनी दूसरी राजधानी बनाया। इसी कारण से उसे 'उज्जैनपुरवराधीश्वर' भी कहा जाता है।
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Explaination :- 'प्रयाग' में आत्मघात करने वाले को पुराणों के अनुसार मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार जो योगी गंगा-यमुना के संगम पर आत्महत्या करके स्वर्ग को प्राप्त करता है, वह पुन: नरक नहीं देख सकता। प्रयाग में वैश्यों और शूद्रों के लिए आत्महत्या विवशता की स्थिति में यदा-कदा ही मान्य थी, किन्तु ब्राह्मणों और क्षत्रियों के द्वारा आत्म-अग्न्याहुति दिया जाना एक विशेष विधान के अनुसार उचित था। अत: जो ऐसा करना चाहें तो ग्रहण के दिन यह कार्य सम्पन्न करते थे, या किसी व्यक्ति को मूल्य देकर डूबने के लिए क्रय कर लेते थे
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Explaination :- वैदिक काल में घग्घर नदी का पुराना नाम दृषद्वती था।
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Explaination :- हड़प्पाई शहरों में सड़कों तथा गलियों को ‘ग्रिड पैटर्न’ पर बनाया गया था, जो एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। अतः कथन (1) सही है। मोहनजोदड़ो का निचला शहर आवासीय भवनों का उदाहरण प्रस्तुत करता है। इनमें से कई एक आंगन केंद्रित भवन थे, जिनके चारों ओर कमरे बने थे। अतः कथन (2) सही है। हड़प्पावासी एकांतता को बहुत महत्त्व देते थे, जो उनकी भवन निर्माण पद्धति से भी परिलक्षित होता है। यहाँ भूमि तल पर बनी दीवारों में खिड़कियाँ नहीं मिलती। इसके अतिरिक्त मुख्य द्वार से आंतरिक भाग अथवा आंगन का सीधा अवलोकन नहीं किया जा सकता था।
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Explaination :- मौर्य साम्राज्य से संबंधित अभिलेखों में से अरामेइक और यूनानी लिपियों का प्रयोग दक्षिण भारत से प्राप्त अभिलेखों में नहीं हुआ है। पश्चिमोत्तर से प्राप्त शाहबाज गढ़ी तथा मानसेहरा अभिलेख खरोष्ठी लिपि में हैं, जबकि अफगानिस्तान से प्राप्त शरेकुन अभिलेख अरामेइक तथा यूनानी दोनों में हैं। अतः कथन (4) गलत है एवं अन्य सभी कथन सत्य हैं।

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